क्या आप मुझे?

 मेरे लिए आसान नहीं किसी के पास आना,

हमेशा ही डर लगता है उनसे दूर जाना।

थोड़ा अजीब हूँ, अपने ख़यालों में खोया हूँ,
कभी अकेले में चुपके से रोया हूँ।
क्या आप  मेरे आँसुओं को समझ पाओगे?

कुछ गलत हो या सही, कह नहीं पाता,
एक छोटा सा भी झूठ सह नहीं पाता।
क्या आप मेरे पूछे बिना सारे सवालों का जवाब दे पाओगे?

मैं बिना शिकायत किए दूर होने लगता हूँ,
अपने ही दर्द से मजबूर होने लगता हूँ।
क्या आप मुझे दूर होने से रोक पाओगे?

थोड़ी सी भी दूरी महसूस होते ही सोचने लगता हूँ,
खुद को पास जाने से रोकने लगता हूँ।
क्या आप मेरी  मन की सभी लहरों को शांत कर पाओगे?

कभी दिल चाहता है सब कुछ बता दूँ,
कभी खामोशी में खुद को छुपा लूँ।
क्या  आप मेरी खामोशी भी पढ़ पाओगे?

मैं अक्सर मुस्कुरा कर दर्द छुपा लेता हूँ,
भीड़ में रहकर भी खुद को तन्हा कर लेता हूँ।
क्या आप उस तन्हाई को मिटा पाओगे?

रिश्तों से डरता हूँ, फिर भी चाहत रखता हूँ,
टूट जाने के बाद भी हिम्मत करता हूँ।
क्या आप  मेरा ये भरोसा निभा पाओगे?

मैं पूरा नहीं हूँ, कुछ अधूरा सा, कुछ टूटा सा हूँ,
हर खुशी में भी थोड़ा सा खोया सा  हूँ।
क्या आप मुझे वैसे ही अपना पाओगे?

अगर कभी मैं बिना वजह खामोश हो जाऊँ,
या बात करते-करते खुद में ही खो जाऊँ,
क्या आप मुझे समझ कर थाम पाओगे?

बस इतना ही चाहता हूँ, की कोई ऐसा सा हो,
जो हमेशा मेरे साथ रहे , चाहे दौर जैसा सा हो।
क्या आप मेरे इस सफर में साथ निभा पाओगे?

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