इस बड़ी सी दुनिया के भू-भाग के किसी कोने में एक चार दीवारी के भीतर, मैं अपने मन में रहती हूँ। मन में मेरे जो सागर हैं, उसकी लहरें हैं असीमित , ये लहरें जल की नहीं, ये है अनकहे शब्दों और विचारों की, या यूँ कहूँ, है ये दर्पण उस वाणी की, जिसे मैं ना कभी बोल सकी.... आश्चर्य नहीं, की इस बड़ी सी दुनिया के एक छोटे से कोने में मैं अपने मन में रहती हूँ, नहीं दे पाती शब्द अपने विचारों को क्योंकि, जब मन की गहराई तक जाती हूँ तो दुनिया छोटी लगती। असीमित इस में, मैं जीवन महसूश करती हूँ, अकेली रहती हूँ यहाँ, पर अकेलापन महसूश नहीं करती। कभी रात के अँधेरे में, जब सारी दुनिया सो जाती है, मैं सबकी नजरों से दूर, इस सागर में खो जाती हूँ। कुछ मन की सुनती हूँ, कुछ उसे सुनाती हूँ, और कभी जो लहरों में उफान बढ़ जाए तो आँखों से कुछ बूंदों को बहाकर हल्का हो लेती हूँ थोड़ी और जगह, कुछ और ही विचारों को समेटने के लिए... सब कहते हैं कि बहुत चुप सी रहती हूँ, हाँ! मैं अपने मन के भीतर शब्दों से एक असीम सागर का निर्माण करती हूँ। इस सागर की गहराई में, मैं खुद से मिलती हूँ दुनिया के लिए हूँ शांत पर यहाँ मैं, जो भरकर बोलती ...
❤️Sweet🦋
🌸
🌿
I saw a cute butterfly,
She was flying high.
She is enough, so strong,
She can fly so long.
She is enough to rise,
To touch the endless sky.
In the past she was in some strain,
She bore some pain,
But she won’t again.
She buries every tear,
Her heart holds silent fears.
She is so caring,
She doesn’t like her problems sharing.
She met me with a beautiful smile,
I like her every style.
One day she will fulfill her every dream,
She will be supreme.
- With 🌻

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